गोराया में चल रहा किताब माफिया का राज़, बच्चों के परिज़न हो रहे परेशान

एक किताब मांगने पर भी कहा ज़ाता मिलेगा किताबों का सैट

गोराया में चल रहा किताब माफिया का राज़, बच्चों के परिज़न हो रहे परेशान

आज़ के इस महंगाई के दौर में हर एक इंसान अपने जरूरत की वस्तु उस दुकान से खरीदता है जहां से उसका बाज़ार से कुछ कम दाम मिले, लेकिन जिला जालंधर के गोराया शहर के लोग अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए ऐसा नहीं कर पा रहे है क्योंकि गोराया में चलने वाले किताब माफिया के राज़ के चलते बच्चों के परिज़नों को मजबूरन महंगे दामों में किताबें खरीदनी पड़ रही है।

 

 

इस संबंधी चंडीगढ़ खबरनामा से बातचीत करते हुए शहर के एक नामी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे के पिता जतिन शर्मा ने बताया कि उनका बेटा और बेटी शहर के एक नामी स्कूल में पड़ते है, जिनकी किताबें वो बीते दिनी जालंधर माई हीरा गेट से ले आए थे क्योंकि एक तो उन्हें गोराया से करीब दो हज़ार रूपए सस्ती मिली दूसरा  उनका जालंधर आना ज़ाना लगा रहता है तो उन्होंने वहां से किताबें खरीद ली। लेकिन किसी कारणवष उन्हें एक किताब वहां से नही मिली तो वो गोराया के नामी दुकानदार के पास वो किताब लेने के लिए चले गए, लेकिन दुकानदार ने उन्हें इस वज़ह से किताब देने के लिए मना कर दिया कि उनको पूरे का पूरा सैट ही लेना होगा नहीं तो एक किताब नहीं मिलेगी। जिस से बच्चों के पेरैंटस को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

 

 

 

ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि ऐसा तो कोई रूल ही नहीं कि दुकानदार पूरा सैंट बेच सकता हो और मात्र एक सिंगल किताब नहीं। दूसरी ओर अगर दुकानदार सैट के तौर पर ही किताबें बेच रहे है तो दुकानदार को कैसे पता कि इस स्कूल की क्लास में इतने ही बच्चे है और वो इत्ने ही सैट किताबों के लेकर आएगा। कही यह स्कूल वालों से मिलजुल कर कोई सैटिंग का खेल तो नहीं खेला ज़ा रहा । कारण कि पंजाब सरकार के आदेशों के बाद अब निजी़ स्कूलों में किताबें मिलना बंद कर दिया गया है लेकिन सरकार ने स्कूल प्रंबधकों की लूट तो बंद करवा दी। लेकिन इस तरीके से किताब माफिया अब भी अपनी मनमानी कर लोगों से ज्यादा पैसा वसूल रहा है।